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锦衣卫

最高法:完善性侵害儿童犯罪人员信息公开制度_我的网站

蒲公英

A |     राज्य ब्यूरो, रांची । झारखंड के स्कूलों में बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर घटी है। दर में यह कमी सभी स्तर पर हुई है। प्राथमिक स्कूलों में तो यह दूर शून्य हो गई है। वहीं, उच्च प्राथमिक स्कूलों में यह दर नौ प्रतिशत से घटकर 1.70 प्रतिशत हो गई है। इसी तरह, माध्यमिक स्कूलों में यह दर 15.16 प्रतिशत से घटकर 3.50 हो गई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा गुरुवार को जारी यूडायस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फारमेशन सिस्टम) प्लस-2024-25 की रिपोर्ट में झारखंड के स्कूलों में ड्राप आउट की दर में भारी कमी आने का तथ्य सामने आया है। यह रिपोर्ट सरकारी, सहायता प्राप्त तथा गैर सरकारी स्कूलों यानी तीनों श्रेणी के स्कूलों के संदर्भ में है।यूडायस प्लस-2023-24 की रिपोर्ट की तुलना में 2024-25 में झारखंड के स्कूलों में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) भी बढ़ा है। यह वृद्धि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों में हुई है। वहीं, प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में सकल नामांकन अनुपात में न तो वृद्धि हुई है और न ही उसमें कमी आई है। प्राथमिक में यह अनुपात 93 तथा उच्च प्राथमिक में पूर्व की तरह 83 है। वहीं, माध्यमिक में नामांकन अनुपात 62 से बढ़कर 73 प्रतिशत हो गया है। वहीं, उच्च प्राथमिक में यह अनुपात 41 प्रतिशत से बढ़कर 49 प्रतिशत हो गया है। झारखंड में शून्य नामांकन वाले स्कूलों की संख्या तो घटी है, लेकिन यह समस्या अब भी बनी है। यहां अब भी 107 स्कूल ऐसे हैं जहां शून्य नामांकन है तथा वहां 31 शिक्षक कार्यरत हैं। वहीं, सिंगल टीचर वाले स्कूलों की संख्या थोड़ी बढ़ी है। ऐसे स्कूलों में अब भी 4,36,480 बच्चे पढ़ रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में स्कूलों की संख्या में आंशिक कमी आई है, लेकिन नामांकन बढ़ा है। वहीं, शिक्षकों की संख्या भी बढ़ी है। इससे छात्र शिक्षक अनुपात में भी सुधार हुआ है। हालांकि अभी भी झारखंड में प्रति स्कूल पांच शिक्षक कार्यरत हैं। झारखंड में प्रति स्कूल औसत नामांकन भी बढ़ा है।,

ऐसे हुआ सुधार

  • इंडीकेटर                                            2023-24               2024-25
  • स्कूलों की संख्या                                  44,475                 44,376
  • कुल नामांकन                                      71,43,255            74,36,931
  • कुल शिक्षक                                         2,06,591              2,09,203
  • छात्र शिक्षक अनुपात                              35                         36
  • प्रति विद्यालय औसत नामांकन                  161                       168
  • शून्य नामांकन वाले स्कूल                          199                      107
  • शून्य नामांकन वाले स्कूलों में कार्यरत शिक्षक  398                      31
  • सिंगल टीचर वाले स्कूल       8,353 9,172
  • सिंगल टीचर वाले स्कूलों में नामांकित बच्चे 4,10,199 4,36,480

कितने स्कूलों में उपलब्ध सुविधाएं (2024-25)

  • लाइब्रेरी/बुक बैंक/रीडिंग कार्नर 42,010
  • खेल का मैदान 32,469
  • डिजिटल लाइब्रेरी 917
  • किचन गार्डन 12,283
  • बालिकाओं के लिए शौचालय (क्रियाशील) 42,324
  • बिजली (क्रियाशील) 41,115
  • सोलर पैनल 6,388
  • कंप्यूटर 33,718
  • इंटरनेट 25,715
  • पेयजल (क्रियाशील) 43,857
。    
最高人民法院今天召开全国法院第七次少年法庭工作会议,会议强调,要牢固树立新时代少年司法理念,坚持最有利于未成年人原则,坚持贯彻“教育、感化、挽救”方针和“教育为主、惩罚为辅”原则,同时体现“包容宽容但绝不纵容”的政策精神,将特殊、优先、双向、全面保护理念落实到每一个案件办理中。要依法严惩杀害、伤害、性侵、拐卖、虐待等各类侵害未成年人身心健康的犯罪行为,对挑战法律和伦理底线的,坚决依法严惩,决不姑息。要妥善审理涉未成年人的家事、侵权等各类民事案件,依法妥善审理各类涉家庭教育、“双减”政策背景下的教育培训类案件,依法开展涉儿童权益纠纷调解工作。

B | 会议要求,要深化少年法庭改革,推动中国特色未成年人审判制度和工作机制更加成熟定型。要完善涉诉未成年人权益的特别保护方式,全面落实未成年人犯罪记录封存制度,探索建立儿童救助协作制度,完善性侵害儿童犯罪人员信息公开制度、性侵儿童案件特殊证据标准。要深度参与综合治理,推动建设更高水平的未成年人综合保护体系。要坚持系统思维,加强与相关单位协作配合,积极参与未成年人保护工作领导小组各项工作,配合有关部门建立家庭教育联动机制,抓好中小学法治副校长品牌工作,加强网络治理和未成年人网络权益保障工作。要充分发挥司法建议、司法白皮书等作用,推动大数据技术与未成年人综合司法保护深度融合,助力破解少年审判折射的社会问题,推动完善社会治理,促进未成年人保护和犯罪预防机制制度不断完善。要深化审判延伸工作,强化未成年人司法救助、未成年罪犯帮教挽救等工作,广泛听取人大代表、政协委员以及社会各界对少年审判工作的意见建议,自觉接受监督,不断加强和改进工作。(总台央视记者 张赛)

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Published on:12:06:20


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